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ज्योति याराजी का शानदार प्रदर्शन: 100 मीटर हर्डल्स में एशिया की क्वीन बनीं भारतीय धाविका

 भारतीय एथलेटिक्स में अगर किसी महिला खिलाड़ी ने हाल के वर्षों में सबसे तेज़ उभरकर पहचान बनाई है, तो वह नाम है ज्योति याराजी। 100 मीटर हर्डल्स में भारत की यह स्टार एथलीट न सिर्फ राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं, बल्कि एशिया स्तर पर भी लगातार भारत का परचम लहरा रही हैं। 2025 में भी उनका प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है।

एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में गोल्ड
दिसंबर 2025 में दक्षिण कोरिया के गुमी (Gumi) में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ज्योति याराजी ने महिला 100 मीटर हर्डल्स में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया। उन्होंने 12.96 सेकंड का समय निकालते हुए न सिर्फ गोल्ड अपने नाम किया, बल्कि चैंपियनशिप रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।
भारतीय एथलीट ज्योति याराजी 100 मीटर हर्डल्स प्रतियोगिता में जीत के बाद तिरंगा लहराती हुईं और रेस के दौरान हर्डल पार करती हुई नजर आती हैं।

इस जीत के साथ ज्योति दो बार की एशियाई चैंपियन बन गईं। इससे पहले उन्होंने 2023 में भी इस इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था। लगातार दो एशियाई खिताब जीतना भारतीय ट्रैक एंड फील्ड इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक
ज्योति याराजी भारत की सबसे तेज़ महिला 100 मीटर हर्डल्स धाविका हैं। उनके नाम राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज है, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनकी तकनीक, स्टार्ट और आखिरी 40 मीटर की स्पीड को विशेषज्ञ विश्वस्तरीय मानते हैं।

चोट के कारण सीमित प्रतिस्पर्धा
हालांकि 2025 सीजन में ज्योति को एक झटका भी लगा। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें घुटने से जुड़ी चोट का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उन्हें कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से दूरी बनानी पड़ी। इसी कारण वह वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में हिस्सा नहीं ले सकीं।

इसके बावजूद, एशियाई चैंपियनशिप में उनका दमदार कमबैक यह दिखाता है कि वह शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होकर लौटी हैं।

भारतीय एथलेटिक्स के लिए उम्मीद
ज्योति याराजी आज भारतीय महिला एथलेटिक्स की नई पहचान बन चुकी हैं। उनका प्रदर्शन आने वाले वर्षों में ओलंपिक और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में भारत की पदक उम्मीदों को मजबूत करता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वह फिट रहीं, तो वह 13 सेकंड से कम का समय लगातार निकालने वाली एथलीट्स में शामिल हो सकती हैं।

आगे की तैयारी
फिलहाल ज्योति का फोकस पूरी तरह रिकवरी, ट्रेनिंग और तकनीकी सुधार पर है। उनका लक्ष्य आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में भारत को पदक दिलाना है। कोचिंग स्टाफ के अनुसार, 2026 सीजन उनके करियर का अहम मोड़ साबित हो सकता है।

ज्योति याराजी सिर्फ एक एथलीट नहीं, बल्कि लाखों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं। सीमित संसाधनों से निकलकर एशिया की चैंपियन बनने तक का उनका सफर भारतीय खेल इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। 100 मीटर हर्डल्स में उनका नाम अब भारत की पहचान बन चुका है।

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